कलम से उफनती देशभक्ति 

कितना आसान है देशभक्ति दिखाना

कितना आसान है तिरंगे मे कफन का आना

सरहद पर एक बार जाकर तो देखो

कितना आसान है घर बैठे कलम चलाना।

 

बूढ़ी माँ के आँसू पर,

कितनी कविताएँ लिख डाली,

उस पत्नी की टूटती चूड़ी पर,

कितनी सहानुभूति लुटा डाली।

 

कागज़ कलम से उफनती देशभक्ति,

फौजी के कुर्बानी से सजती हर पंक्ति,

बहुत सोचा मैने जज्ब़ात को रोक कर,

हर रात गुज़रती है वहाँ बंदूक की नोक पर ।

 

देश के नाम पर हर वक्त फौजी को ना मारो

कहानी को रोचक बनाने के लिए,

बार बार घर बैठे दुश्मन को ना पुकारो।

 

© रंजीता अशेष

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