आवाज़ 

#कटाक्ष #आवाज#fightback

चाय की चुस्की संग,

क्या खूब पढ़ा अखबार,

पहले पन्ने की बड़ी खबर,

‘आज फिर हुई अस्मत तार तार’।

 

कितना आसान है खबर दिखाना,

लोगों मे रोष और द्वेष जगाना,

उसकी इज्जत का पंचनामा है इनका अधिकार,

जिस्म से रूह तक  झेलती अत्याचार ।

 

क्या गजब असर हुआ मिडिया का,

मोमबत्ती लेकर फिर खड़ा युवा इंडिया का,

सब छपेगा, आंदोलन बनेगा,

आरोप प्रत्यारोप का दौर चलेगा,

उस लड़की को ढूँढ कर लाएँगे,

जागरूकता के नाम पर गंद दिखाएँगे,

कचहरी मे तो चंद लोग ही सुन पाते,

अब उसके लुटने की कहानी पूरे भारत मे लाइव बताएँगे,

कहानी को टी आर पी के लिए और मनोरंजक बनाएँगे,

डर और खौफ के माहौल को टी वी पर खूब भुनाएँगे।

 

क्या तुम एक कठपुतली हो,

जिसने जहाँ घुमाया,वहाँ घूम रही,

सब जान रही हो,फिर भी आँखे मूँद रही,

अपनी शक्ति पहचानो,

कर धारण रूप चण्डी का,

अपनी आबरू संभालो,

बच कर नही,लड़ कर जीतोगी,

वरना हर खबर के साथ बिकोगी,

बनो आवाज़ अपनी करूण पुकार की,

बैठे मत रहना, कभी उम्मीद मे सुधार की।

 

रंजीता अशेष

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12 thoughts on “आवाज़ 

  1. आपकी आवाज बुलंद है
    लेखनी और भी शक्तिशाली
    बहुत सुंदर खाका खींचा है
    मतलब की ओट मे शोर मचाने वालो का
    शुभरात्रि

    Liked by 1 person

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