मुझको तो शिवजी भाते 

अपनी लाडली बीटिया से,

बाबुल ने पूछा, बड़े दुलार से,

‘किस प्रभु सरीखा वर मै ढूँढू’,

जो जीवन,भर दे तुम्हारा प्यार से।

 

राम सी जिसमे शीतलता हो,

श्याम सी जिसमे चपलता,

सिद्धार्थ सा जिसमे तेज हो,

और महावीर सी सरलता।

 

सुनकर हृदय संताप किया,

बोली वो, ऐसा मैने क्या पाप किया,

नही चाहिए वर इनमे से कोई,

नारी को जैसे श्राप दिया।

 

माना सब भगवान है,

मानव जाति पर एहसान है,

पर दूल्हा अगर इन सा हो तो,

नारी जाति का अपमान है।

 

दुनिया के उद्धार की खातिर,

पत्नी से क्यों मुँह मोड़ आए,

साथ जीने की कसमे खाकर,

बीच मझधार क्यों छोड़ आए।

 

मुझको तो शिव जी भाते,

जो पार्वती संग रास रचाते,

अर्धनारीश्वर का रूप धरकर,

पूरे जग मे धूम मचाते।

 

उनके जैसा ज्ञानी ढूँढो,

उनके जैसा सीधा और शांत ,

हर ऋतु ,हर बाधा मे साथ रहे

चाहे हो भीड़,चाहे एकांत।

 

© रंजीता अशेष

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36 thoughts on “मुझको तो शिवजी भाते 

  1. वाह वाह वाह—-इसीलिए लड़कियां शिव शंकर की पूजा करती है।सब का साथ छूटा परन्तु शिव का पार्वती से —कभी नहीं।बहुत खूब।

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