माँ मुझको बहुत याद आती हो तुम 

#Maa

Reason behind my book “Sushmaanjali ”

कैसे तन्हा छोड़ गई तुम,

कैसे हमसे मुँह मोड़ गई तुम,

तुम्हारे बिना कोई पल ना बीता,

ऐसे कैसे इतनी दूर चली जाती हो तुम,

माँ मुझको बहुत याद आती हो तुम।

 

बचपन से लेकर आज तलक,

कोई दिन ना बीता पाएँ तेरी झलक,

तुम चुपचाप सुनती रहती मेरी हर बकवास,

किसी की जरूरत नही लगी मुझे,

जब तुम थी मेरे पास,

हर वो मेरी बात को कैसे सुन जाती हो तुम,

माँ मुझको बहुत याद आती हो तुम ।

 

तुम्हारे चेहरे का तेज मुझको बहुत भाता था,

तुम्हारे शांत स्वभाव से मन खिल सा जाता था,

ईश्वर पर आस्था रखना और खुद पर रखना विश्वास,

बोली मुझको हँसती रहना हरपल बेटा,कभी ना होना उदास

इतनी गहरी बात यूँ आसानी से कैसे कह जाती हो तुम,

माँ मुझको बहुत याद आती हो तुम ।

 

© रंजीता अशेष

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My book ” Sushmaanjali. .Ek kaavya sangrah ” available on amazon

http://www.amazon.in/dp/9384535605

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26 thoughts on “माँ मुझको बहुत याद आती हो तुम 

  1. bahut hi behtareen tarike se paish kiya apne bhawukta ko

    wo maa hi hoti hai jo ro deti hai
    khuda ki baargah me hanth utha kar
    ashq jab ruksaar se ho kar aanchal me girta hai
    tab arsh or farsh bhi hilta hai
    uski har dua me main hun “Ansari”
    or meri har saans me uski dua hai

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