नन्ही परी

A poem for my daughter…A struggle of a mother to save her child…who was preterm baby…in incubator.With gods grace she is now 7 yrs old:mrgreen:

तुम्हारे नन्हे हाथों पर

जब मैने पट्टियाँ लगाई

आँखो से हर दिन आँसू मेरे गिरे

रूठ ना जाए खुदा,सहनी पड़े ना जुदाई।

 

तु मेरा इम्तिहान थी,तु मेरा सम्मान थी

तुझको ज़िन्दा रखने की ज़िद थी मेरी

तु मेरा प्यार, मेरा अभिमान थी।

 

मौत को शिकस्त देकर

तुम मेरे पास चली आई

हर तारा टिमटिमाया ,जब

लेने लगी  तु अंगड़ाई।

 

आज जब तुमको देखती हुँ

खुशी से मन खिल जाता है

तु मेरी गुड़िया, तु मेरी परी

तेरे होने से सारा जहाँ मुझे मिल जाता है।

© रंजीता अशेष

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47 thoughts on “नन्ही परी

  1. रंजीता जी, यह बहुत ही भावुक और मार्मिक कविता लिखी है आपने। शुभकामनायें

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