राम है मेरी अंतरात्मा 

राम है मेरी ,मेरी अंतरात्मा,

जिसको मुझे विजय बनाना है,

लोभ,मोह आदि प्रपंचो को,

रावण समझ जलाना है ।

यूँ ही नाम नही पड़ा तयोहार का,

अर्थ बहुत इसका गहरा है,

दस सवार्थी अवगुणो ने,

हम पर बाँध रखा पहरा है ।

राम बनकर मन मस्तिष्क को ,

हमको चेताना है,जिस रावण,

को ढूँढ रहे सभी, उसको अपने

भीतर मार गिराना है।
     

©रंजीता अशेष 

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